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टीपू सुल्तान भी उतना ही विदेशी था जितने की ब्रिटिश

April 6, 2013

टीपू सुल्तान भी उतना ही विदेशी था जितने की ब्रिटिश. जो भी सेकुलर यह कहता है की टीपू सुल्तान भारतीय था, वह एक दिमागी बीमार है.

टीपू सुल्तान ने हिंदी, संस्कृत को अपनी मातृभाषा मानने से नकार दिया था. उसके लिए भारत एक ऐसा देश था जो उसके सौदी-अरब से आये पूर्वजो ने युद्ध में जीतकर उसे दिया था.

किसीके भारत में पैदा होने से वो व्यक्ति भारतीय नही बनता. वो कौनसी भाषा को माँ मानता है, इसपर निर्भर करता है की वो कौन है. टीपू सुल्तान इस्लाम को माँ और अरबो को बाप मानता था. और भारत उसके लिए केवल युद्ध में जीता गया प्रदेश था.

अब आप समझ गये होंगे की वन्दे मातरम(ये भारत मेरी माँ है) गाने में मुसलमानों की गांड क्यों जलती है. क्युकी ये लोग आजतक हिंदी, संस्कृत को नही अपना पाए(उर्दू विदेश भाषा है जिसको टीपू सुल्तान जैसे हरामियो ने थोंपा था भारत पर), फिर ये अपेक्षा करना ही व्यर्थ है की ये भारत को माँ समझेंगे. इनका केवल एक ही उद्देश्य है – भारत में उर्दू लागू करना, भारतीय भाषाओ का अरबीकरण करना.

कांग्रेस इस मांग का समर्थन करती है, जबकि बीजेपी इसका विरोध करती है. इसीलिए जो जो हिंदूवादी ग़ालिब की गंदगी फैलाते रहते है फेसबुक पर, और उर्दू घुसेड घुसेड कर हिंदी का बलात्कार करते रहते है वो हिन्दू नही, दास है विदेशियों के. इससे तो अच्छा है की अंग्रेजी बोलो. कम से कम कुछ तो स्वाभिमान बचता है. यदि हिंदी इतनी ही कठिन है, तो हिंदी की बीस बोलिया है इस देश में, उनसे से कोई भी एक चुन लो. कोई कमी नही है इस देश में शब्दों की.

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