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कांग्रेस और बीजेपी मे क्या अंतर है ? …पार्ट – २

April 7, 2013

भारत मे कुछ सेकुलर हिन्दू परिवार मुघलो को भारतीय संस्कृति घोषित कर चुके है, वो कांग्रेस को समर्थन देते है. या फिर यूँ कहो की वो कांग्रेसी पिल्लू बन चुके है. जबकि मुघल पर्शियन थे, भारतीय नही. उनको तो हिंदी का एक शब्द भी नही आता था. अकबर ने जीवन मे कभी हिंदी नही बोली. ये बोलीवुड मे सब झूठ दिखाते है क्युकी मुघलो को भारतीय घोषित करना है. मुघलउतने ही विदेशी थे, जितने की ब्रिटिश.

इसके पीछे कारण यह है की उनको ईरान, पाकिस्तान से “व्यापारिक लाभ” की अभिलाषा है. सम्पूर्ण विश्व मे भारत एकमेव ऐसा देश है जहाँ के हिन्दू अपनी बेटिया, और धर्म बेचने के तयार है तेल के लिए. और कोई भी देश ऐसा बिकाऊ नही है. दूसरा कारण ये है की भारत के सेकुलर हिन्दु परिवारों की फटती है अपना हिन्दू इतिहास बोलीवुड मे दिखाने मे, वो मुघलो की ही चाटने मे संतुष्टी का अनुभव करते है.

मीडिया भी इन्ही कुत्तो के हाथ मे है. इसीलिए हिंदुत्व की बात करने वालो की ये लोग बजाते है, और विदेशी मुघलो को भारतीय बताते है. और टीपू सुल्तान भी भारतीय नही था. “सुल्तान” यह शब्द भारत के शब्दकोष मे आता ही नही है. ये गुलामी की संस्कृति मे लपेट रखा है भारत को इन हरामीयो ने.

बीजेपी जब सत्ता मे आई थी, तो उसने मुरली-मनोहर जोशी को शिक्षा-मंत्री बनाया था. इसपर कांग्रेस ने हंगामा मचा दिया, क्युकी उसे पता था ये जोशी क्या करेगा. वो सबसे पहले इतिहास मे की गई सेकुलरो की कारीगरी खोलना शुरू करेगा. और ऐसा होते ही कांग्रेस का सेकुलर वोटबैंक की माँ चुद जाएगी, क्युकी शिक्षा-तन्त्र से ही युवा बनते है. 

मौलाना आजाद(भारत का पहला शिक्षा-मंत्री, एक मुसलमान !) ने भारत के इतिहास(स्कूली की पुस्तके ही इतिहास बनाती है) की जो नीव रखी थी, उसमे मुघलो को भारत का मसीहा घोषित किया गया था, जबकि मुघल विदेशी थे, उन्होंने भारत की हिन्दू बेटिया अरबो को बेचीं थी नंगी करके उनके बाजार मे, उन्होंने ही भारत मे भंगी-समाज का निर्माण किया. उन्होंने ही ताज-महल, क़ुतुब-मीनार हडपे, जो की हिन्दुओ के बनाये हुए थे. 

मौलाना ने पुरे इतिहास को ऐसे लिखा की हिन्दू अकबर के आजू-बाजू घूमते रहे और अपना कुल, इतिहास पढ़ ही ना पाए. क्युकी हिन्दुओ के कुलो के विषय मे लिखा ही नही गया !.. जरा पढकर बताओ की मुघल काल मे जो राजपूतनी(मारवाड़) से लेकर दक्षिण तक जो गौंड थे उनका इतिहास किधर है पुस्तको मे ??.. कहा गया ?… वो लिखा ही नही गया, क्युकी मौलाना जो बैठा था शिक्षा-मंत्री बनकर.

और स्कुलो मे पुरे इतिहास की पुस्तको मे केवल तीन-सौ वर्ष के ब्रिटिश-कल का वर्णन किया गया ताकि हिन्दू ब्रिटिशो को ही भारत के अधोःपतन का कारण मान ले और मुघलो ने जो विनाश किया भारतीय संस्कृति, भाषा, आर्थव्यवस्था, विज्ञानं का वो हिन्दू कभी जान ही ना पाए. हिन्दुओ के मारवाड़ के कुल, राजपूतनी, मौर्य, विक्रमादित्य, चाणक्य का पत्ता ही काट दिया इतिहास से ! ताकि कोई ये ना कहे की “अरे ब्रिटिश के आने से पहले ही भारत की लगा चुके थे मुघल तो. ये मुघल तो विदेशी थे”. चाणक्य का अर्थशास्त्र, विक्रमादित्य के शाशन-सूत्र सिखाने की जगह पुस्तको मे केवल विदेशी मुघलो को भर दिया और उन्हें भारतीय बता दिया. और उनको बहुत बड़ा उदारवादी, सुशिल, कलाकार, संगीत-प्रिय बता दिया. जोशी इसी इतिहास की सच्चाई को फोड़ने के लिए बिठाया गया था. 

जब २००३ मे बीजेपी सरकार गिरी, तो कांग्रेस ने सबसे पहला कार्य यह किया सत्ता मे आते ही – अर्जुन सिंह को शिक्षा-मंत्री बनाया और शीघ्र-अतिशीघ्र जोशी ने जो कार्य किये थे, उसको पलटने को कहा.

इसीलिए सेकुलर मीडिया बार-बार यह प्रयत्न करती है यह दिखाने का की बीजेपी मोदी को समर्थन नही देती, ताकि हिन्दुओ मे फुट पड जाए और वो बीजेपी से टूट जाये. बीजेपी मे अंदरूनी लड़ाई कितनी भी हो, परन्तु एक बात पर सभी सहमत है – मुघल भारतीय नही थे, वो पर्शियन थे. और भारत यह मूलतः हिन्दू-संस्कृति है. और विश्व का कोई भी देश अपनी मूल संस्कृति छोडकर विदेशियों की संस्कृति को अपने यहाँ जगह नही देता. ऐसा किसी भी देश मे नही होता.

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