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April 9, 2013

“जनता द्वारा, जनता के लिए, जनता का शासन वाला गणतन्त्र”…….. या “नेता द्वारा, नेता के लिए, नेता का शासन वाला गणतन्त्र ” नाराजगी तंत्र से है, राष्ट्र से नहीं, उन ‘अमर बलिदानियों’ से नहीं, जिनके बलिदानों के दम पर हम स्वतंत्र और गणतंत्र है ! इस संविधान को बदलना हे, वरना बी जी पी भी आगे जा कर कांग्रेस बन जाएगी

 

 

जैसा की परिदृश्य देखने से लगता है , चूंकि “मोदी जी” बीजेपी का सर्वाधिक सफल, उन्नतशील और प्रेरक नेता बन चुका है अतः एक सोच समझी साजिश के तहत उसके खिलाफ ‘एक अभियांन’ चलाया जा रहा है., जिससे की जो कम ‘विचारशील लोग’ है वे ऐसी बातों पर तुरंत विश्वास कर ले लेते हैं !. ( लोगो का मानसिक स्तर केवल उनके आस-पास घटित होने वाली घटानयो से सबसे जायदा प्रभावित होता है , मीडिया का प्रतिदिन दिखाया जाने वाला ‘ झूठ’ भी ‘सच’ प्रतीत होता है )

 

जब तक ‘जातीय’ आधार पर नौकरी और प्रमोशन में आरक्षण मिलता रहेगा, तब तक जातीय भेदभाव समाप्त नही हो सकता है ! बल्कि ऐसा लगता है की जाती के आधार पर आरक्षण देकर जातीय भेदभाव को संवैधानिक मान्यता दी जा रही है ! सही है दलित जाए ‘मायावती’ के साथ ,मुसलमन जाए ‘मुलायम सिंह’ के साथ…..सेकूलाएर जाए “कांग्रेस के साथ” ………..देश का क्या है कुछ ओर टुकड़े होने दो ..’खालिस्तान’…..’मुगलिस्तान’..’.दलितिस्तान’….’.स्वर्णस्थान’…

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