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**********भारत के नपुंसकता का एक कारण **********

April 18, 2013

भगवद गीता में जीवन जीने का संदेश है. गीता जीवन जीने के लिए प्रेरणा देती है, प्रोत्साहित करती है.

इसके उल्टा भारत के भांड-बाबा जीवन से दूर हटकर प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होने वाली इच्छाओ को दबाने का संदेश देते है. यदि आपको क्रोध आ रहा है, तो लम्बी लम्बी सांसे लो, क्रोध को दबा डालो, कुचल डालो अंदर ही ताकि वह जहर अंदर ही फैला रहे. वह कुंठा अंदर ही दबी रह जाये आपकी स्मृति में.

जबकि गीता में इसका उल्टा बताया गया है. जीवन को खुलकर जीयो, निर्भय होकर जीयो. भय में कभी मत जीयो. अन्याय होने पर कभी मत झुको. अपनी इच्छाओ को कभी मत दबाओ.

आजकल के सदगुरु(भांड-बाबा), पुस्तक पढ़ पढ़ के आते है(जो आप भी पढ़ सकते है संस्कृत में, यह कोई गुप्त-ज्ञान नही) और लोगो को नपुंसक बनाते है क्युकी वह वही बाते बोलते है जिनसे उनको राजनैतिक तंत्रों से हानि ना हो

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