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jatiwaad ka jahar

April 19, 2013

कबीलों में बंटता समाज, ऊँचे होते जातियों के पहाड़ ….अपाहिज बनाने के लिये प्रतिबद्ध व्यवस्थायें। हाँ, यही है आज का कटु सत्य! घोषणायें हो रही हैं साहू समाज, देवांगन समाज, गोंड समाज, यादव समाज, हलबा समाज, क्षत्रिय समाज, मुस्लिम समाज के भवन निर्माण के लिये …….राशि की घोषणा। हर समाज को अपना अलग समाज बनाने की प्रेरणा भारतीय समाज को सामाजिक समरसता की ओर ले जायेगी या कबीलावाद की ओर ? अपरोक्ष रूप से हर जाति को अपने पृथक अस्तित्व ….पृथक पहचान के लिये प्रेरित किया जा रहा है। तात्कालिक उद्देश्यों की पूर्ति के लिये ये सियासती चालें भारतीय समाज को पतन की ओर और देश को विखण्डन की ओर ही ले जायेंगी। समाज को तय करना होगा कि उसका समाज कौन सा है, मानव समाज या साहू समाज, सतनामी समाज ……या और कुछ? हम जातिवाद को पोषित करते जा रहे हैं इस घोषणा के साथ कि जातिवाद भारतीय समाज का कलंक है। हम लोगों को बांटते जा रहे हैं इस पाखण्डपूर्ण घोषणा के साथ कि हम तो समाज को जोड़ने का …उसके उत्थान का पुण्य काम कर रहे हैं।

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