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sala tharki buddha randibaaz gandhi

April 19, 2013

आओ तुम्हे आज तथाकथित सेकुलरो और मुल्लो के “बापू” के गुमनाम सत्य और झूट के किससे सुनाये ………..

1)‘ब्रह्मचर्य के प्रयोग’ के बारे में गाँधी का झूट :- 
अपने ब्रह्मचर्य की परीक्षा के लिए वे महिलाओं के साथ एकांतवास करते थे, स्वयं निर्वस्त्र होकर उनसे अपने शरीर की मालिश कराते थे और लड़कियों को निर्वस्त्र करके अपने साथ सुलाते थे। ऐसा उन्होंने स्वयं अपनी आत्मकथा में लिखा है। इन प्रयोगों द्वारा गाँधी के ब्रह्मचर्य की परीक्षा तो हो जाती होगी, परन्तु उन महिलाओं के ब्रह्मचर्य का क्या होता था? सरदार पटेल ने भी उनसे ऐसे प्रयोगों कोबन्द करने का आग्रह किया था, परन्तु वे नहीं माने।

सच्चाई – ‘ब्रह्मचर्य के प्रयोग’ के बजाय ‘सेक्स के प्रयोग’ हुआ करते थे …इनकी पुस्तक का नाम “सत्य के प्रयोग” की बजाय “सेक्स के प्रयोग” होना चाहिए

२)गाँधी का झूट – दूध गाय या भेंस के थनों को खींचकर निकाला जाता है, इसलिए पशुओं के प्राप्त होने के कारण माँसाहार की श्रेणी में आता है। गाँधी अंडे को शाकाहारी मानते थे, क्योंकि अंडे मुर्गी स्वयं देती है। खैर, यहाँ तक तो ठीक है। दूध के बिना काम न चलने पर उन्होंने गाय या भेंस की जगह बकरी का दूध पीना शुरू कर दिया।
क्या बकरी का दूध निकालने के लिए उसके थनों को नहीं खींचा जाता? क्या बकरी अपना दूध मूत्र की तरह स्वयं निकालती है? क्या गाँधी की परिभाषा के अनुसार बकरी का दूध माँसाहार नहीं है?

सच्चाई – बकरी का दूध पीने से कामुकता बढती है और सेक्स पावर की जरुरत तो शायद सेक्स के प्रयोग करने वाले वैज्ञानिक को ही पड़ेगी ?

३. गाँधी का झूट -‘सादा जीवन उच्च विचार’
गाँधी गरीबी में रहने का पाखंड करते थे। वे गरीबों की तरह रेल में तीसरी श्रेणी में यात्रा करते थे। लेकिन उनके लिए उनके चेले पूरा डिब्बे पर कब्जा कर लेते थे। इस गुंडागर्दी का गाँधी विरोध नहीं करते थे और अपनी सुविधा के लिए यह मान लेते थे कि उनके लिए जनता ने खुद डिब्बा खाली छोड़ दिया है। वे बकरी का दूध पीते थे, इसलिए हर जगह बकरी उनके साथ ही जाती थी। वे इस बात की चिंता नहीं करते थे कि इस दिखावे पर कितना खर्च होगा।

सच्चाई – सरोजिनी नायडू ने एक बार स्पष्ट स्वीकार किया था कि गाँधी को गरीब बनाये रखने में हमें बहुत धन खर्च करना पड़ता है। क्या अधिक धन खर्च कराते हुए भी गरीबी में रहने का दिखावा करना पाखंड नहीं है?

४. एक तरफ पाकिस्तान कश्मीर पर कब्ज़ा ज़माने के लिए हमला कर रहा था और दूसरी तरफ गाँधी भारत सरकार पर लगातार पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपया देने के लिए दबाव डाल रहे थे….यानि दुश्मनों को पैसा देकर हमला करने के लिए न्योता देना ?

५. गाँधी ही था जिसने मोहम्मद अली जिन्ना को कायदे-आज़म की उपाधि दी।

६. मोहम्मद अली जिन्ना ने गाँधी से विभाजन के समय हिन्दु मुस्लिम जनसँख्या की सम्पूर्ण अदला बदली का आग्रह किया था जिसे गान्धी ने अस्वीकार कर दिया। आज देश फिर विभाजन के कगार पर खड़ा है कारण फिर वही है जो आजादी के समय था ?

७. वल्लभभाई पटेल का बहुमत से चुनाव सम्पन्न हुआ किन्तु गाँधी की जिद के कारण यह पद जवाहरलाल नेहरु को दिया गया…आगे नेहरु और उनके खानदान ने क्या दुर्गंती किया उसका पाप अभी तक हम लोग चूका रहे है….

८. द्वितीया विश्वा युध मे गाँधी ने भारतीय सैनिको को ब्रिटेन का लिए हथियार उठा कर लड़ने के लिए प्रेरित किया , जबकि वो हमेशा अहिंसा का ढोल बजाते है

९. कॉंग्रेस के त्रिपुरा अधिवेशन में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को बहुमत से कॉंग्रेस अध्यक्ष चुन लिया गया किन्तु गाँधी पट्टभि सीतारमय्या का समर्थन कर रहा था, अत: सुभाष बाबू ने निरन्तर विरोध व असहयोग के कारण पदत्याग कर दिया। बेचारे नेताजी देश-विदेश समर्थन के लिए भटकते रहे जबकि उनके देश में गाँधी तो सहयोग नहीं दिया …कितनी बढ़ी विडम्बना है..सोचिये नेताजी सुभाष यदि इस देश को नेतृत्व देते तो शायद हमें सम्पूर्ण आजादी मिलती….

१०. 14-15 जून, 1947 को दिल्ली में आयोजित अखिल भारतीय कॉंग्रेस समिति की बैठक में भारत विभाजन का प्रस्ताव अस्वीकृत होने वाला था, किन्तु गाँधी ने वहाँ पहुंच प्रस्ताव का समर्थन करवाया। यह भी तब जबकि उन्होंने स्वयं ही यह कहा था कि देश का विभाजन उनकी लाश पर होगा।

११. अमृतसर के जलियाँवाला बाग़ गोली काण्ड (1919) से समस्त देशवासी आक्रोश में थे तथा चाहते थे कि इस नरसंहार के खलनायक जनरल डायर पर अभियोग चलाया जाए। गान्धी ने भारतवासियों के इस आग्रह को समर्थन देने से मना कर दिया।

१२, भगत सिंह व उसके साथियों के मृत्युदण्ड के निर्णय से सारा देश क्षुब्ध था व गाँधी की ओर देख रहा था कि वह हस्तक्षेप कर इन देशभक्तों को मृत्यु से बचाएं, किंतु गाँधी ने भगत सिंह की हिंसा को अनुचित ठहराते हुए जनसामान्य की इस माँग को अस्वीकार कर दिया। क्या आश्चर्य कि आज भी भगत सिंह वे अन्य क्रान्तिकारियों को आतंकवादी कहा जाता है।

१३.एक बार एक वाल्मीकि बस्ती में मंदिर में गाँधी जी कुरान का पाठ करा रहे थे. तभी भीड़ में से एक औरत ने उठकर गाँधी से ऐसा करने को मना किया. गाँधी ने पूछा .. क्यों? तब उस औरत ने कहा कि ये हमारे धर्म के विरुद्ध है. गाँधी ने कहा…. मै तो ऐसा नहीं मानता ,तो उस औरत ने जवाब दिया कि हम आपको धर्म में व्यवस्था देने योग्य नहीं मानते. गाँधी ने कहा कि इसमें यहाँ उपस्थित लोगों का मत ले लिया जाय. औरत ने जवाब दिया कि क्या धर्म के विषय में वोटो से निर्णय लिया जा सकता है?? गाँधी बोला कि आप मेरे धर्म में बांधा डाल रही हैं. औरत ने जवाब दिया कि आप तो करोडो हिन्दुओ के धर्म में नाजायज दखल दे रहे हैं. गाँधी बोला ..मै तो कुरान सुनुगा .औरत बोली …मै इसका विरोध करुँगी. और तभी औरत के पक्ष में सैकड़ो नवयुवक खड़े हो गए.और कहने लगे कि मंदिर में कुरान पढवाने से पहले किसी मस्जिद में गीता और रामायण का पाठ करके दिखाओ तो जाने. विरोध बढ़ते देखकर गाँधी ने पुलिस को बुला लिया. पुलिस आई और विरोध करने वालों को पकड़ कर ले गयी .और उनके विरुद्ध दफा १०७ का मुकदमा दर्ज करा दिया गया .और इसके पश्चात गाँधी ने पुलिस सुरक्षा में उस मंदिर में कुरान पढ़ी.Image

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